05.21
2008
garmi aur kisan
उफ्फ! यह गर्मी, और यह धूप
न दिखे हरी घास का कोई तिनका
पंछी ने भी आमबर से मुह मोड़ लिया
न गूँजे मधूर संगीत, न दिखती तितलिय Read full shayari →
उफ्फ! यह गर्मी, और यह धूप
न दिखे हरी घास का कोई तिनका
पंछी ने भी आमबर से मुह मोड़ लिया
न गूँजे मधूर संगीत, न दिखती तितलिय Read full shayari →