05.22
2008
Nazro ki Gustakhi
हाथों में है जाम
पिलाती है तुम्हारी आँखे आज शाम
दर्द को कजरे से छुपाए
इठलाती है तुम्हारी आँखें आज शाम Read full shayari →
हाथों में है जाम
पिलाती है तुम्हारी आँखे आज शाम
दर्द को कजरे से छुपाए
इठलाती है तुम्हारी आँखें आज शाम Read full shayari →