2007
~ Meri Mohabbt ~

हमदर्दी का नाम ना दे
एह तो है मोहब्बत मेरी
अहसान का मुझे क़रार ना दे
चाहा है तुझे दिल से
समझती हूँ मैं जज़्बात तेरे
मेरी बात भी तू समझ ज़रा
नाम उसका तू बार बार ना ले
कही ये दिल उससे बेवाफ़ी ना दे दे
वादा किया है तो निभाना पड़ेगा
चाहे मेरी जान चली जाए
वाडा किया है तो मुझे जाना ही पड़ेगा
इस मोहब्बत को तू आज़माना ले
देखी है नामी मैने उन आखों मैं
चाहे ये मेरा वहेम क्यो ना हो
देखा है उसने मोहब्बत से मुझे
विश्वाष है मुझे उन आखों पे
उससे भूलना आब आसान ना होगा
एह बंधन हो गया है पुराना
मुझे उन बाहों मैं जाना होगा
इस दिल मैं घर आपना तू भी बनाना ले
शायद ये ज़िंदगी की भूल हो
मुझे एह ज़ोखिम उतना होगा
लाए हम आपने घर क़ातिल को
आब मंज़िल-ए-अंजाम इस इश्क़ को दे
तू आज मुझसे एक वाडा कर दे
चोरना ना मुझे तू कभी
तू मेरा हाथ आज थाम ले
संभाल लेना गर ज़िंदगी मुझे डोखा दे दे









