2008
An innocent expression
खुदा एक बात है दिल में
तुजसे पूछना चाहूँगी
देवीना बनाया तूने क्यो मुझे
आपने हर अदा का Read full shayari →
खुदा एक बात है दिल में
तुजसे पूछना चाहूँगी
देवीना बनाया तूने क्यो मुझे
आपने हर अदा का Read full shayari →
उफ्फ! यह गर्मी, और यह धूप
न दिखे हरी घास का कोई तिनका
पंछी ने भी आमबर से मुह मोड़ लिया
न गूँजे मधूर संगीत, न दिखती तितलिय Read full shayari →

इतनी बड़ी धरती हमारी
और छोटे से हम
मानव, मीन्न. पशु, और पातिंगे
लाखो जीवों का एह घर;
धरती पेर, धरती के नीचे,
कुछ रहते धरती की उपर,
सब मे जीवन, सब है बराबर,
नही है कोई क्म|
इतने बड़ी धरती हमारी
और छोटे से हम|
रंग-बिरंगे, पेर, पकंगे,
माघ, गगन पंछी मंडराते;
दाने दो ही चुगते लकिन
मीठे, लंबे गीत सुनते;
डगमग चलते, नाचा करते
ख़ुश रहते हेर दम|
इतनी बड़ी धरती हुमारी
और छोटे से हम|
कई, घास, पौधे नन्हे,
जीवन रक्षक वृक्ष हुमरे;
रोटी. दल, सब्ज़ी, फल
आनोंदो के श्रोत हुमरे;
जब तक भूमि हरी रहेगी
स्वस्थ रहेंगे हम|
इतने बारी धरती हुमारी
और छोटे से हम|