2008
Sher on Parastish
दिल से पुकारू तुझे
ए मंज़िल तू है कहा
यह कदम अब थम से रहे है
ए खुदा तू है कहा
*
हवाए रुख़ बदल रही है Read full shayari →
दिल से पुकारू तुझे
ए मंज़िल तू है कहा
यह कदम अब थम से रहे है
ए खुदा तू है कहा
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नदियो का अंत है सागर
मगर सागर मे बाढ़ आती नही
बदल जाए चाहे सारा संसार
बस तू न बदलना कभी..
*
nadiyo ka ant hai sagar
magar sagar me badh aati nahi
badal jaye chahe sara sansar
bas tu na badalna kabhi..
***
क्या खुदा की इबादत करे
वो जिससे रोटी का एक टुकढा
भी नसीब नही होता
खून बेचा था उसने
तो तोफ़े मैं हथकड़ी मिली
या अल्ला! या अल्लाहा !
की खुदा उसकी दुआ सुन
इस हद तक तो न सता
उस टुकड़े के लिए
कुत्ते और उसकी जंग हो…!
*
kya khuda ki ibaadat kare
wo jisse roti ka ek tukdha
bhi nasib nahi hota
khoon becha tha usne
to thofe main hathkadi mili
ya Allha! Ya Allaha !
ki khuda uski dua sun
is had tak to na sata
us tukde ke liye
kutte aur uski jang ho…!
_-_The_Prayer_(1865).jpg)
शुक्रिया ए-खुदा
अनमोल जीवन तूने दिया
तेरी बरकत मेरी ईबबादट
तेरी नाम से पल पल जिया
सुनहरी किरने शीतल चँदनी
सुख में दुख में अरमानो को जिया
मदहोश हवाएं लुभाती हरियाली
जन्नत नही मिली तो है क्या
यार हज़ार और मेरा प्यार
जो सोचा वो है मिला
ए-खुदा रखना सलामत
आचल मैं अपने है दुआ
कभी उच नीच कभी अंधेरा
नही तूने हरपल है साथ दिया
देर भले सही अंधेर नही
तुमने है वादा किया
शांति सुकून और हसी लबी पे
तूने मुझे जो दिया
शुक्रिया ए-खुदा
अनमोल जीवन तूने दिया