2008
वो क्यो मुझसे यह बात छुपाते होगे
अपने प्यार अपने जज़्बात से हार गया
सब कुछ लूट के बिखर सा गया
वो कियो मेरी बात नही सुनना चाहते Read full shayari →
अपने प्यार अपने जज़्बात से हार गया
सब कुछ लूट के बिखर सा गया
वो कियो मेरी बात नही सुनना चाहते Read full shayari →
प्यार क्या है यारो
उस दोस्त से पूछो
जिसने प्यार किया
पर उस प्यार ने उसे
दोस्ती का करार दियादोस्ती क्या है प्यारो
उस इंसान से पूछो
जिसने दोस्ती के खातिर
खुद को कुर्बा किया
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Pyaar kya hai yaaro
us dost se pucho
jisne pyaar kiya
Par us pyaar ne use
Dosti ka karar diya
Dosti kya hai pyaaro
us insan se pucho
jisne dosti ke khatir
khud ko kurba kiya
उनने चाहा हममे
है किस्मत हमारी
उनकी चाह को हम
चाह ना सके
हमे चाहे वेल हज़ार
जिसे हम चाहे उसे
पा ना सके||
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Unne chaha hamme
hai kismat hamari
Unki chah ko hum
Chah na sake
Hame chahe wale hazar
Jise hum chahe use
Pa na sake||
मेरा सनम मुझसे जुदा हुआ है
लगता है मुझसे ख़फा खुदा हुआ है
घिर घिर काले बदल आते है
लगे बरखा का राज शुरू हुआ है
अब भाता नही चिढ़या का संगीत
मन मेरा यूह बेचैन हुआ है
आजा पिया लगाले गले
तेरे बीन सुना संसार हुआ है
नीली छतरी वाले की अजब है रीत
दिलो का बंधन अनमोल दिया है
ताना बना मिलाया इस कदर
सोचने वाला अभी भी सोच रहा है
मेरा सनम मुझसे जो जुदा हुआ है
मुझसे ज़रूर ख़फा खुदा हुआ है

इन्ही क़ब्रो में दफ़न
कही मेरी भी कोइ लाश होगी
संध्या पे उमीद की उजले की
तकदीर ने कहा आब सिर्फ़ रात होगी
प्यासी है येह सुखी धरति
तम्मना मेरे खून से इसकी शांत होगी
इन्हें क़ब्रो में दफ़न
कहि मेरी भी कोइ लाश होगी
चैन नही है, छेढ़ रहे है उस लाश को सब
शयद मौत के बाद भी कोइ मौत होगी
नोच के कतरा कतरा भी तसली नही मिली
इसकी भूख के खुरख नाजाने कहा जन्मी होगी
इन्ही क़ब्रो में दफ़न
कही मेरी भी कोइ लाश होगी

अहसान लगती है ये ज़िंदगी
ए! ज़िंदगी यूह ना उदास कर
मौत भी आती नहीं
ए! ज़िंदगी यूह ना रुला
गुठ गुठ के जी रहे है हम
ए! ज़िंदगी यूह ना सता
हँसी के दो पल फ़ितरत से मिलता है
ग़म के साय मैं
हम ओझल से हो गाये
क्या करू आब उमीड़
जब हार भी ना रही
मंज़िल खो चुकी हूँ मैं
आब तो जीने की
प्यास भी ना रही
तोड़ दिया एक फूक मे
वो सपनो का
आशियाना मेरा
क्या करूँ शिखवा अब
मैने चाँद तो रीते देखा है

इस्कदार मुझे कतरा
कतरा यूह ना मारये
क़त्ल केरना ही है तो
खंजर से वार कीज़ेया
आहिस्ता आहीसाता तरपाने मेय
आप ख़ूब लुफ्ट उठाते है
इन बदनासीब आहो की
आप यूँ ना ब्दुआ लेजिए
इस्कदार मुझे कतरा
कतरा यूँ ना मारये

ज़िंदगी हैं तो दर्द भी होगा ही
दर्द ही ना हो तो कुशी
का आहेसास होगा ही नही
पेर आब एह दर्द ब्रदास्त नही होता
क्या कहे की दिल मचलाने
दो पल को आए थी कुशी
आप अपना रंग रूप दिखा के
आपना दीवाना बनके
हमको तनहीयो मेय
इस कदर बेरूख़ी से छोड़ गयी
सोचा ना था की कुशी
को पालेने के बाद भी
इतना गुम भी मिले गा हममे कभी
आज एह दास्तान यहा लिख डाली हैं
दिल के एह आवाज़ आज
ज़ुबान पे जो हैं आई तो सही
ख़ुद से भी ना रही कोई उम्मीद
दफ़न है ज़ख़्मो-ओ-दर्द मे हम
तेरी मोहब्बत का गीत गुंगुनाते
मार मार के जी रहे है कही हम
सरक रहे है अँगरे नैनो से
और तार तार जाल रहे है हम
सरक रही है पैरो तले ज़मीन
फिर भी क्यो संभाल रहे है हम