~ इन्ही क़ब्रो में दफ़न … मेरी लाश ~

इन्ही क़ब्रो में दफ़न
कही मेरी भी कोइ लाश होगी
संध्या पे उमीद की उजले की
तकदीर ने कहा आब सिर्फ़ रात होगी
प्यासी है येह सुखी धरति
तम्मना मेरे खून से इसकी शांत होगी
इन्हें क़ब्रो में दफ़न
कहि मेरी भी कोइ लाश होगी
चैन नही है, छेढ़ रहे है उस लाश को सब
शयद मौत के बाद भी कोइ मौत होगी
नोच के कतरा कतरा भी तसली नही मिली
इसकी भूख के खुरख नाजाने कहा जन्मी होगी
इन्ही क़ब्रो में दफ़न
कही मेरी भी कोइ लाश होगी
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October 16th, 2007 at 11:43 am
good…..
a nice thought …
but u need more and more fluency…
keep going…
October 17th, 2007 at 4:44 pm
Thanx… !! Tulsi … wud love if u wrote some words of inspiration
Huh
February 27th, 2008 at 1:01 pm
u have great feeling and mind nice job dear i liked!~
February 29th, 2008 at 6:52 pm
Thanx a lot Kasmik!!