2007
~~ ज़िंदगी से मुक्ति ~~

नया तो हर पल होता है
एक बार जो आया एक बार जो गया
दोबारा दर्शन नही देता है
पेर ज़िंदगी के एह पल
एक ही रंग के लगते है
कब आते हैं कब जाते हैं
आहेसास भी नही दिलाते हैं
हम तो उब गाये है
कुछ देर आब सोना
हम चाहते है
की खुअबों मैं ही
देख ले रंगीन ज़िंदगी
इस ज़िंदगी से हम आब
मुक्ति चाहते है






